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maithilisharan gupt

1 - 12 de 12 resultados para “maithilisharan gupt
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  • Urmila (Hindi Epic)

    उर्मिला (खण्ड-काव्य)

    लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला के विरह वेदना का काव्यात्मक वर्णन इस पुस्तक में मैथिलीशरण जी ने किया है ... Leer más

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  • Panchvati (Hindi Epic)

    पंचवटी (खण्ड-काव्य)

    पंचवटी (खण्ड-काव्य) में राम, सीता और लक्ष्मण का किस प्रकार से जीवन व्यतीत हो रहा है इसका बहुत ही रोचक वर्णन किया गया है.... ... Leer más

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  • Gau Mata Chalisa (Hindi Prayer)

    गौ माता चालीसा

    गौएँ प्राणियों का आधार तथा कल्याण की निधि है। भूत और भविष्य गौओं के ही हाथ में है। वे ही सदा रहने वाली पुष्टिका कारण तथा लक्ष्मी की जड हैं। गौओं की सेवा में जो कुछ दिया जाता है, उसका फल अक्षय होता है। गौ-माता की आराधना हेतु प्रेमनारायण ने चालीसा की रचना की है। ... Leer más

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  • Bhaj Govindam (Hindi Prayer)

    भज गोविन्दम्

    ‘भज गोविन्दम्’ देखने में भले ही छोटा ग्रन्थ लगे, परन्तु वास्तव में आदि शंकर की यह एक महत्वपूर्ण रचना है। इसमें वेदान्त के मूल आधार की शिक्षा सरल गान में दी गई है, ताकि कोई बुद्धिमान व्यक्ति अगर इसका अध्ययन सच्चाई के साथ करे तो उसके सारे मोह नष्ट हो सकते हैं, और इसीलिए इसका एक मान पड़ा ‘मोह-मुद्गर’। ... Leer más

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  • Premmurti Bharat (Hindi Religious)

    प्रेममूर्ति भरत

    भरत के व्यक्तित्व का दर्शन हमें ‘राम वन गमन’ के पश्चात् ही होता है। उसके पहले उनका चरित्र-मूक समर्पण का अद्भुत दृष्टान्त है जिसे देखकर कुछ भी निर्णय कर पाना साधारण दर्शक के लिये कठिन ही था। इसी सत्य को दृष्टिगत रख कर गोस्वामी जी ने ‘राम वन गमन’ के मुख्य कारण के रूप में भरत प्रेम-प्राकट्य को स्वीकार किया। जैसे देवताओं ने समुद्र-मन्थन के द्वारा अमृत प्रकट किया था ठीक उसी प्रकार राम ने भी भरत-समुद्र ... Leer más

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  • Manas Aur Bhagwat Me Pakshi (Hindi Religious)

    मानस और भागवत में पक्षी

    ‘श्रीरामचरितमानस’ विलक्षण एवं महत्त्वपूर्ण सांकेतिक भाषा में प्रस्तुत किया गया है। यही बात ‘श्रीमद्भागवत’ के सन्दर्भ में भी है, ‘श्रीमद्भागवत्’ के वक्ता परमहंस शुकदेव हैं। यहाँ पर दो शब्द जुड़े हुए हैं, एक ओर तो उन्हें शुक के रूप में प्रस्तुत किया गया और शुक एक पक्षी है, पर उसके शुकत्व के साथ-साथ हंस शब्द भी जुड़ा हुआ है तथा उसका तात्पर्य यह है कि ‘श्रीमद्भागवत्’ के जो श्रेष्ठतम वक्ता हैं, चाहे आप ... Leer más

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  • Sugreev Aur Vibhishan (Hindi Religious)

    सुग्रीव और विभीषण

    ‘श्रीरामचरितमानस’ में एक ओर श्रीसुग्रीव का चरित है और दूसरी ओर श्रीविभीषण हैं और दोनों के चरित में जो भगवान् का मिलन होता है, उस मिलन में श्रीहनुमान् जी ही मुख्य कारण बनते हैं। फिर भी सुग्रीव और विभीषण के चरित में अन्तर है और इस अन्तर का मुख्य तात्पर्य यह है कि भगवत्प्राप्ति के लिए किसी एक विशेष प्रकार के चरित और व्यक्ति का वर्णन किया जाय तो उसको सुनने वाले या पढ़ने वाले के मन में ऐसा लगता है कि ... Leer más

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  • Vijay, Vivek Aur Vibhuti (Hindi Religious)

    विजय, विवेक और विभूति

    तीन वस्तुएँ प्राप्त होती हैं - विजय, विवेक और विभूति, परन्तु किसको? एक शब्द जोड़ दिया गया कि जो ‘सुजान’ हैं। ‘रामायण’ का पाठ और श्रवण तो बहुधा अनेक लोग करते ही रहते हैं, परन्तु गोस्वामीजी ने जो ‘सुजान’ शब्द जोड़ दिया, यह बड़े महत्व का है। कहने वाला भी सुजान हो और सुनने वाला भी सुजान हो, यह गोस्वामीजी की शर्त है। यह सुजान शब्द कहाँ से जुड़ा हुआ है, इस पर ध्यान दीजिए! श्रीराम की जब रावण पर विजय हुई ... Leer más

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  • Parashuram Samvad (Hindi Religious)

    परशुराम संवाद

    आजकल रामलीला में लोगों को लक्ष्मण-परशुराम तथा अंगद-रावण संवाद अधिक रोचक प्रतीत होता है जिसमें अधिक भीड़ होती है। जिस दिन झगड़े की बात हो, तू-तू, मैं-मैं हो, उस दिन लोगों को अधिक रस की अनुभूति होती है। बहिरंग दृष्टि यही है, पर ‘रामायण’ में ये दोनों प्रसंग गम्भीर हैं। दोनों प्रसंग एक-दूसरे के पूरक हैं। उस सूत्र पर आप दृष्टि डालिए, जिस संदर्भ में ये दोनों संवाद हुए हैं। धनुष टूटने पर परशुराम आते हैं ... Leer más

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  • Bhagwan Sriram-Satya Ya Kalpana (Hindi Rligious)

    भगवान श्रीराम-सत्य या कल्पना

    आज के युग का मानव एवं समाज उत्तरोत्तर दिग्मूढ़ होकर मूल्यहीनता के गम्भीर गर्त में गिरता जा रहा है। 'स्वार्थ' का दानव अपना विकराल मुँह फैलाए - मनुष्य की सुख-शांति को निगलता जा रहा है। हम पाश्चात्य देशों की भौतिक उन्नति-समृद्धि की चकाचौंध से प्रभावित होकर भोगवादी संस्कृति में अपनी अनुरक्ति बढा रहे हैं। भूमण्डलीकरण और बाजारवाद के इस दौर में मनुष्य स्वयं एक वस्तु बन गया है। त्याग, समर्पण, परहित, प्रेम, ... Leer más

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  • Srimadbhagwadgita (Hindi Prayer)

    श्रीमद्भगवद्गीता

    श्रीमद्भगवद्गीता' आनन्दचिदघन, षडैश्वर्यपूर्ण, चराचरवन्दित, परमपुरुषोत्तम साक्षात् भगवान् श्रीकृष्ण की दिव्य वाणी है। यह अनन्त रहस्यों से पूर्ण है। परम दयामय भगवान् श्रीकृष्ण की कृपा से ही किसी अंश में इसका रहस्य समझ में आ सकता है। जो पुरुष परम श्रद्धा और प्रेममयी विशुद्ध भक्ति से अपने हृदय को भरकर भगवद्गीता का मनन करते हैं, वे ही भगवत्कृपा का प्रत्यक्ष अनुभव करके गीता के स्वरूप की किसी अंश में झा ... Leer más

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  • Kankaal (Hindi Novel)

    कंकाल

    उपन्यास अपने समय के नेताओं और स्वयंसेवकों के चरित्रांकन के माध्यम से एक दोहरे चरित्रवाली जिस संस्कृति का संकेत करता और बनते हुए जिन मानव संबंधों पर घण्टी और मंगल के माध्यम से जो रोशनी फेंकता है वह आधुनिक यथार्थ की पृष्ठभूमि बन जाता है। सृजनात्मकता की इस सांकेतिक क्षमता के कारण यह उपन्यास यथार्थ के भीतर विद्यमान उन शक्तियों को भी अभिव्यक्त कर सका है जो मनुष्य की जय यात्रा पर विश्वास दिलाती है। ... Leer más

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